पहली प्यार कभी भुलाये भी भूली नही जाती क्या है ये पहला-पहला प्यार ,हर कोई अंजान है इससे ,हर कोई बेखबर है इससे लोग लाख भुलाना चाहे ,फिर भी भुला नही पाते है....अपनी पहली मोहबत्त को, अपनी पहले चाहत को उस समय हर कोई अंजान होता है , कि कैसे कोई चुपके से उसके दिल के आंगन में दस्तक दे देती है, और पता चलता है तब ,जब वो पूरी तरह से उसके प्यार में खो जाता है यह तक कि आदर्शो पर चलने वाला कठोर ह्रदय दिल में भी कब प्यार के नर्म घास उग जाते है , ये उसे पता नही चलता जब पता चलता है तो वो पाता है कि वो तो किसी के प्यार में पूरी तरह से बंध चूका है ,और फिर उसी कि याद में आहें भरता रहता है हर सभी कि पहली प्यार कि ,पहली चाहत कि एक अजब -अनोखी ,रोमांटिक कहानी होती है जिसे वो जब भी अपने जिन्दगी में याद करता है तो एक मुस्कान के साथ आंसू के दो बूंद उसके गालो को सहलाते हुए होठो को चूम कर उसके महबूब के पुकार में खो जाता है
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