मेरी निगाहों में मेरी सपनों के लकीरों से खिंची गई तस्बीर हो तुम उस तस्बीर में मेरे लिए निकली हुई तक़दीर हो तुम मेरे मायूस दिल के लिए एक रंगीन हो तुम तुम एक जबाब हो , तुम एक सबाल हो आज भी अधखुली किताब हो जितनी भी तस्बीर आँखों में बसाई, दिल में सजाई, कूंचे से बनाई उनमे तुम खास हो जिन्दगी की आस हो तुम अनबुझी प्यास हो ......
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