बचपन की यादें ... आज फिर दिल में आया , एक हुक -सी उठी जेहन में मन मेरा उस में समाया मै याद करू मीठी यादें जो बरसों पहले गुजर गयीं , मै याद करू उन दोस्तों को जो संग मेरा छोड़ गया हाँ -हाँ याद आया वो पल जब मै अठखेलीयां किया करता एक मासूम-सा था वो पल बड़ा अलबेला बना करता कभी कांच की गोलियों से मै मन बहलाया करता , कभी लुकाछिपी के खेल में खुद को दोस्तों से छिपाया करता आज खुद छिपे है दोस्त मेरे मै अश्हाय उन्हें खोज रहा , उनके दीदार करने के लिए कोई बहाना खोज रहा हाँ -हाँ याद आया वो पल जब नदियाँ के जल से खेला करता नदियाँ की शक्ति से मै अपने शक्ति को तौला करता कभी दोस्तों के संग लड़ाई -झगड़ा किया करता कभी बन उसका प्यारा सुख -दुःख पूछा करता पर , आज वो सब .... एक सपना बनकर रह गया मेरे दिल के एक कोने में एक डिबिया में बंद होकर रह गया आज बचपन की यादें कर मेरी आँखे भर गायी , इस धरती से टकराने से पहले आंसू निर्झर बन के गिर गयी
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