आशा ............अंजनी कु.
सड़क के उस पार.........अंजनी कु.
वेलेंटाइन डे ........अंजनी कु.
आरक्षण .........अंजनी कु.
स्कूलों के नामांकन में आरक्षण
शिक्षा-संस्थानों में आरक्षण
नौकरियों में आरक्षण
चारों ओर आरक्षण ही आरक्षण है |
आरक्षण के कारण साक्षर भी
निरक्षर जैसा हो रहे है
जिन्हें मिलना चाहिए रोजगार
वे वेरोजगार हो रहे है |
नौकरियों में अयोंग्यों की भरमार है
आरक्षियों को काम न करने से सरोकार है
पड़ रहा है गलत प्रभाव उधोगों पर
दिखता नहीं कुछ भी
देश में विकाश का असर |
आरक्षण का प्रभाव
विकाश पर नगण्य नजर आता है
क्योकि ले रहे है वही लाभ
जो इसके जन्मदाता है |
जब भी आती चुनाव की बेला
बढ़ जाती आरक्षण की मान
अपने खामियों को ढाकने हेतु
नेताएं बढ़ा देता है आरक्षण
क्यूंकि इसी पर निर्भर करता है पूरा शुसासन |
विधार्थियों पर लाठी बरसाई जा रही है
क्यूंकि आरक्षण को
जन-जन में फैलाई जा रही है |
ये आरक्षण, कितनों को पहनाया ताज
ये आरक्षण कितनो को कर दिया
रोटी से भी मुहताज |
ये आरक्षण बनी सरकार को भी
कितनों बार गिराई है ,
ये आरक्षण , हर रंग में भंग मिलाई है
ये आरक्षण अपने देश में
गजब की करतब दिखाई है |
जब -जब याद आती आपकी वफाई......अंजनी कु.
आंशुयों की सैलाब लाती
यादों की बारात लाती
आपका चेहरा ही
मेरे नजरों पे छा जाती...
पर ये कमबख्त आंसू
इसे धो डालती है ....
एक धुंध -सी लकीर बनकर
आपका चेहरा फिर से खो जाती है |
फिर भी यादों के ये पन्नें
समाप्त नही होते है ,
अगर एक समाप्त हो जाये
तो दूसरा तैयार होते है |
आप ही कहिए मै क्या करु
यादों के इन पन्नों को
मेरा जी चाहता है
की जला दूँ इन्हें पर ...
ये यादों के पन्नें ही तो
मेरे साथ परिछाई बनके रहती है
आप जुदा रहते है
पर ये जुदा नहीं रहती है |
आग की लपटे.........अंजनी कु.
इन आग की उड़ती लपटों ने ,कितनो को उड़ाई है
फिर उसे उड़ा कर , जमी पे भी गिराई है |
ये आग की लपटें हि कुछ एसा है ........
हर भूखा प्यासा है , उन्ही में जलती है ये लपटें
क्योकि ये लपटें है ..........भूख की आग की लपटे |
पहला प्यार .............अंजनी कु.
पहली प्यार कभी भुलाये भी भूली नही जाती क्या है ये पहला-पहला प्यार ,हर कोई अंजान है इससे ,हर कोई बेखबर है इससे लोग लाख भुलाना चाहे ,फिर भी भुला नही पाते है....अपनी पहली मोहबत्त को, अपनी पहले चाहत को उस समय हर कोई अंजान होता है , कि कैसे कोई चुपके से उसके दिल के आंगन में दस्तक दे देती है, और पता चलता है तब ,जब वो पूरी तरह से उसके प्यार में खो जाता है यह तक कि आदर्शो पर चलने वाला कठोर ह्रदय दिल में भी कब प्यार के नर्म घास उग जाते है , ये उसे पता नही चलता जब पता चलता है तो वो पाता है कि वो तो किसी के प्यार में पूरी तरह से बंध चूका है ,और फिर उसी कि याद में आहें भरता रहता है हर सभी कि पहली प्यार कि ,पहली चाहत कि एक अजब -अनोखी ,रोमांटिक कहानी होती है जिसे वो जब भी अपने जिन्दगी में याद करता है तो एक मुस्कान के साथ आंसू के दो बूंद उसके गालो को सहलाते हुए होठो को चूम कर उसके महबूब के पुकार में खो जाता है








